एक भीड़ भरी ट्रेन में जी-कप से भी बड़े स्तनों वाली एक महिला के निपल्स पर ज़बरदस्त हमला! उंगलियाँ, जीभ, औज़ार... वो चरम सुख में डूबी रहती है, यहाँ तक कि उसे अपने निपल्स से चरम सुख पाना आ जाता है! उसके निपल्स इतने ज़्यादा संवेदनशील हैं कि वो अति संवेदनशील क्लिटोरिस की तरह हो जाते हैं! वो अपनी सारी समझ खो देती है और बार-बार चरम सुख पाते हुए अपना आत्म-पीड़ादायक चेहरा दिखा देती है! इतना ही नहीं, वो महिला दोबारा मिलने का अपना वादा निभाते हुए खुद ट्रेन में चढ़ जाती है और कहती है, "मैं अपने निपल्स को और भी विकसित करना चाहती हूँ..."